Haridwar Jyotish

बेहतरीन जिंदगी का सच्चा आधार निस्वार्थ सेवा : प्रो. सतसंगी

-निस्वार्थ कर्म (सेवा) के दान की है महत्ता, आर्थिक दान की नहीं कोई जगह, सतसंग, सेवा और ध्यान मूल मंत्र, प्राणी मात्र की सेवा और जीव मात्र का कल्याण मुख्य शिक्षा-राधास्वामी सतसंग दयालबाग आगरा के गुरू (प्रमुख) प्रो. पीएस सतसंगी से हमारे संवाददाता खास बातचीत की, प्रो. सतसंगी उत्तराखंड में इन दिनों रुड़की, देहरादून, मंसूरी, लेंढौर सहित कई स्थानों का कर रहे हैं अध्यात्मिक दौरा

ज्योति सिंह, हरिद्वार।

कर्म के जरिए अध्यात्म प्राप्ति के उद्देश्य को लेकर काम कर रहा राधास्वामी संत मत इस वर्ष अपने प्रवर्तक स्वामी जी महाराज की दो सौंवी जयंती मना रहा है। इस मौके पर अगस्त माह में सतसंग के आगरा स्थित मुख्यालय दयालबाग में विशेष आयोजन की तैयारी है, इसमें राधास्वामी सतसंग के सभी फिरकों के साथ आने की पूरी संभावना है। संस्था के अध्यात्मिक प्रमुख आचार्य प्रो. पीएस सतसंगी ने धर्म और विज्ञान को एक-दूसरे की कसौटी पर कसने का काम किया है, इस विषय में उनके द्वारा लिखित जर्नल को साइंस एंड कांसिशनेस व टूवर्डस साइंस एंड कांनसिशनेस फोरम पर विश्व स्तर पर सर्वाधिक मान्यता मिली है। राधास्वामी सतसंग दयालबाग के प्रमुख गुरु प्रो. पीएस सतसंगी से दैनिक जागरण ने इस मौके पर विशेष बातचीत की, प्रो. सतसंगी इन दिनों उत्तराखंड के अध्यात्मिक दौरे पर हैं।


राधास्वामी सतसंग के उद्देश्य के बाबत् पूछे गए प्रश्न के जवाब में उन्होंने कहाकि राधास्वामी सतसंग का उद्देश्य प्राणी मात्र की सेवा और जीव मात्र का कल्याण है। यही वजह है कि सतसंग कर्म के जरिए अध्यात्म प्राप्ति का रास्ता दिखाता व सिखाता है। उद्देश्य है कि बेहतरीन जिंदगी बसर की जाए, दुनिया अपनी ओर खिंचती है, इससे जीव जन्म-मरण में फंस जाता है। राधास्वामी संत-मत दुनियावी दायित्व की पूर्ति संग अध्यात्म प्राप्ति का अनोखा दर्शन है। इसका मूल मंत्र बेहतरीन जिंदगी बसर करने को निस्वार्थ सेवा है। यही वजह है कि हमारे यहां अर्थ के दान की जगह कर्म, सेवा के दान की महत्ता है, उसी की ही मान्यता है। गुरु के बाबत् पूछे जाने पर प्रो. सतसंगी ने बताया कि हमारे यहां आपसी सहमति (एक्लेमेशन) के जरिए गुरु (आचार्य) का चयन होता है, वो ही इस संस्था का अध्यात्मिक प्रमुख होता है। देश में इस वक्त राधास्वामी सतसंग कई फिरकों में बंटा हुआ है, ऐसे में राधास्वामी संत मत के प्रवर्तक स्वामी जी महाराज के 200वीं जयंती वर्ष में उनके बीच एकता के बाबत् पूछे जाने पर उन्होंने कहाकि संसार इतना बड़ा और विस्तृत है कि एक जगह करने से काम नहीं चलेगा, अलग-अलग जगहों पर आचार्यों द्वारा इसकी शिक्षा दी जा रही है, जगह अलग है पर, रास्ता और लक्ष्य एक ही है। रही बात एकता की तो मैं समझता हूं कि इसकी शुरुआत हो गई है, राधास्वामी सतसंग दयालबाग ने 2010 मुरार घोषणा पत्र के अनुसार सभी तरह के वाद को बिना शर्त एकमुश्त वापस लेकर इस दिशा पहल कर दी है, इसके सकारात्मक परिणाम दिखने लगे हैं। स्वामी जी महराज की 200वीं जयंती के अवसर पर सभी के एक मंच पर आने की पूरी संभावना बन गई है। 200वां वर्ष इस संदर्भ में ऐतिहासिक होगा।
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धर्म और विज्ञान के बीच खाई पाटने की कोशिश,

हरिद्वार। धर्म और विज्ञान के बीच विरोधाभाष को दूर करने के लिए उनके द्वारा किए जा रहे प्रयास के बाबत् राधास्वामी संत मत द्वाार किए जा रहे प्रयास पर बताया कि विश्व स्तर पर इस मामले में ‘साइंस एंड कांसिशनेसÓ और टूवर्डस साइंस एंड कांसिशनेसÓ फोरम के जरिए इस पर प्रभावी काम हो रहा है। हमारे साथ विश्व स्तर पर कुछ अन्य धार्मिक संस्थाएं भी इस काम में लगी हैं, इसका वार्षिक सम्मेलन हर वर्ष अमरीका में होता है। इसमें दुनिया भर के अध्यात्मिक गुरु और वैज्ञानिक जिसमें जाने-माने गणितज्ञ, चिकित्सक, व विज्ञानी भाग लेते हैं और अपनी बात पूरे प्रमाण संग रखते हैं। अपनी बातों को एक-दूसरे की कसौटी पर कसते हैं। विश्वस्तर पर पिछले सात-आठ वर्षों से यह प्रक्रिया निरंतर चल रही है। प्रयास यह है कि धर्म और विज्ञान के बीच संतुलन स्थापित हो, जो जिसका स्थान है, वह उसे पूरे सम्मान के साथ मिले। धर्म विज्ञान के आगे की चीज है, जिसे आंतरिक अनुभवों व योग साधनों के प्रयोग से जाना-पहचाना जा सकता है। राधास्वामी सतसंग की पुस्तक ‘डिस्र्कोसेज आफ राधास्वामी सतसंतÓ व ‘अमृत वचनÓ में इसकी जानकारी विस्तार से दी गई है। युवा पीढ़ी जिसकी धार्मिक आस्था कम होती जा रही है, धर्म के प्रति उसके विश्वास को बढ़ाने की दिशा में यह बेहतर और प्रभावी प्रयास है। यह प्रसन्नता का विषय है कि आज विज्ञान भी इसे मान्यता देने लगा है, उनकी रूचि धर्म में बढ़ी है, जिसकी वजह से युवाओं की अब तेजी के साथ धर्म में आस्था बढ़ रही है।

27 Replies to “बेहतरीन जिंदगी का सच्चा आधार निस्वार्थ सेवा : प्रो. सतसंगी

  1. Importance of selfless service in pursuit of spiritual journey for salvation is best exampled in Radhasoami faith…with merging of scientific thought with consciousness studies today’s generation can look forward to their own spiritual journey and discovery n purpose of self.

    1. Selfless service leads to ultimate satisfaction, happiness and transformation to a state of ultimate bliss

  2. Radhasoami faith is the only path in today’s world which leads to true salvation while leading a normal worldly life.

    1. Selfless service leads to ultimate satisfaction and happiness and transformation to a state of ultimate bliss

  3. Radha soami satsang beas’ guru Baba Gurinder Singh made me impotent. He has done black magic on me. Do not go to this place.

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