Haridwar Jyotish

परमात्मा को नहीं परमात्मा के जानकार को तलाश करें

देहरादून।
आज परमात्मा को प्राप्त करना सबसे आसान है। परन्तु आज के इंसान ने उसे सबसे कठिन लक्ष्य बना रखा है। जो जिझासु होते हैं वो परमात्मा को ढूंढने के बजाय परमात्मा के जानकार अवतरित रूप सद्गुरू को ढूंढते हैं जिनके द्वारा परमात्मा की अनुभूति की जा सकती है। उक्त आश्य के विचार संत निरकारी  सत्संग भवन हरिद्वार रोड बाईपास के तत्वावधान में आयोजित रविवारीय सत्संग कार्यक्रम में पधारे सन्तों-भक्तों प्रभु प्रेमियों को वर्तमान सद्गुरू माता सविन्दर हरदेव जी महाराज का पावन संदेश देते हुए ज्ञान प्रचारक पूज्य बहन उषा अरोड़ा जी ने व्यक्त किये।


उन्होंने आगामी 18 से 20 नवंबर तक 70वें वार्षिक समागम पर प्रकाश डालते हुये आगे फरमाया कि निरंकारी विचारधारा की वास्तविक सम्पत्ति है – आध्यात्मिक धरोहर। यह आध्यात्मिक धरोहर किसी ने अर्जित नहीं बल्कि सद्गुरू देव के माध्यम से विरासत में उपलब्ध है। संत समागम के वातावरण में ऐसी सुगन्ध  प्रभावित है। आज भी रमणीक दृश्य उपस्थित हो जाता है जहां प्रेम प्यार भक्ति के तराने गाये जाते हैं तभी तो भक्ति भरा जीवन जीने के लिये संत सदा उत्साहित रहते हैं। खिल-खिलाकर ठहाके मारता तनाव मुक्त जन सैलाब दूर-दूर तक प्रकाशमय आध्यात्मिक रंग में रंगा ऐसा विशालकाय परिसर जो धरा-धाम पर मानवता के स्वर बिखेरता है।
निरंकारी समागम खुशहाली का प्रतीक वार्षिक संत समागम मानवता के उस मसीहा की देन है जिन्होंने 36 वर्षों तक रात दिन विश्व भर में कल्याण यात्राओं के माध्यम से जन-जन को खुश किया है। एकत्व की फुहार से ऐसी आत्म-तृप्ति प्रदान की जाती है कि दीवारों के बिना वल्र्ड विदाउट वाॅल की परिकल्पना साकार हो उठती है। उन्होंने कहा कि ऐसे बड़े संत समागम हम एकता, भाईचारे के लिये करते हैं। सत्य प्रभु निरंकार का ज्ञान हमें मिला है जिसका जीवन में प्रयोग करना जरूरी है, तभी हमारा जीवन सार्थक होगा और कर्म के द्वारा ही ज्ञान की संभाल होगी और इसी से एकत्व की भावना पैदा होगी।
सत्संग समापन से पूर्व अनेकों सन्तों, भक्तों ने गीतों, प्रवचनों तथा गढ़वाली, पंजाबी, हिन्दी, कुमाउंनी भाषा का सहारा लेकर संगत को निहाल किया। मंच संचालन बहन शशि बिष्ट जी ने किया।

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