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कॉलेजों में सेमेस्टर प्रणाली को खत्म करने के पक्ष में सरकार, ये बताया गया कारण

ब्यूरो।
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने प्रदेश के शासकीय डिग्री काॅलेजों में सेमेस्टर प्रणाली को समाप्त करने पर सहमति व्यक्त की है। उन्होंने इस निर्णय को छात्रों, शिक्षकों व अभिभावकों के व्यापक हित में बताते हुए कहा कि इससे शिक्षकों को अध्यापन कार्य के लिये तथा छात्रों को एन.सी.सी, एन.एस.एस, खेलकूद व अन्य रचनात्मक एवं शिक्षणेत्तर कार्यक्रमों में भागीदारी हेतु समय की उपलब्धता रहेगी। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों के कैम्पस काॅलेजों में सेमेस्टर प्रणाली पूर्व की भांति ही रहेगी।
मंगलवार को सचिवालय में मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत से अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के पदाधिकारियों ने भेंट की। इस अवसर पर उच्च शिक्षा राज्य मंत्री डाॅ. धन सिंह रावत भी उपस्थित थे। पदाधिकारियों ने प्रदेश के महाविद्यालयों में सेमेस्टर प्रणाली समाप्त करने के साथ ही महाविद्यालयों की विभिन्न समस्याओं से मुख्यमंत्री को अवगत कराया। उनका कहना था कि सेमेस्टर प्रणाली के कारण छात्रों को एन.सी.सी, एन.एस.एस, खेलकूद, सांस्कृतिक कार्यक्रम आदि रचानात्मक गतिविधियों के लिए पूरा समय नहीं मिल पाता है, इससे उन्हें सुविधा होगी।
उन्होंने महाविद्यालयों में 20 प्रतिशत सीटें बढ़ाये जाने, महाविद्यालयों में भवन, प्रयोगशाला, पुस्तकालय, कक्षाओं, शौचालयों व पेयजल जैसी कई मूल-भूत सुविधाओं की स्थिति में सुधार लाने, प्रदेश में शासकीय एवं अशासकीय महाविद्यालयों में स्वीकृत प्राध्यापकों एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के पदों के सापेक्ष वर्तमान में कार्यरत प्राध्यापकों एवं कर्मचारियों के रिक्त पदों को अविलम्ब भरे जाने के साथ ही राज्य में स्थापित सभी विश्वविद्यालय अपना शैक्षणिक कलेण्डर घोषित करने तथा प्रवेश, परीक्षा, परिणाम नियमित करने, एन.सी.सी, एन.एस.एस खेलकूद, सांस्कृतिक गतिविधियाँ, रचनात्मक गतिविधियाँ एवं विद्यार्थियों का सेल्फ डेवलपमेंट प्रोग्राम पाठ्यक्रम में शामिल किये जाने की भी उन्होंने मांग रखी।
इस अवसर पर राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री श्री श्रीनिवास, क्षेत्रीय संगठन मंत्री श्री मनोज नीखरा, प्रदेश अध्यक्ष डाॅ.कौशल कुमार, प्रांत सगठन मंत्री श्री प्रदीप शेखावत, प्रदेश छात्रसंघ कार्य प्रमुख श्री संकेत नौटियाल सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।

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