Kumbh Mela Haridwar 2021

किन्नर अखाड़े के कारण शाही स्नान पर हो सकता था खूनखराबा, आईजी कुंभ की सूझबूझ से टला

विकास कुमार।
हरिद्वार कुंभ मेला 2021 के पहले शाही स्नान पर बडी घटना हो सकती है। मेला पुलिस का दावा है कि 1998 कुंभ में हुए रक्तरंजित घटना की तरह ही हालात पहले शाही स्नान पर बन गए थे। लेकिन आईजी कुंभ मेला संजय गुंज्याल की समझबूझ और त्वरित एक्शन के कारण हादसा होने से बच गया। हालांकि, इसका पहले से ही अंदाजा लगाया जा रहा था कि एक ही रुट पर अखाडों को शाही स्नान के लिए भेजने और वापसी कराने के दौरान जरा सी देरी या लापरवाही ​बडे संकट को न्यौता दे सकती है और पुलिस का दावा है कि पहले शाही स्नान पर किन्नर अखाडे के देरी से निकलने के कारण ऐसे हालात बन गए थे।

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क्या हुआ था पहले शाही स्नान पर
हरिद्वार में वर्तमान में चल रहे कुम्भ मेला 2021 में 11 मार्च को शिवरात्रि शाही स्नान में परम्पराओं के अनुसार सिर्फ 07 सन्यासी अखाड़ों के द्वारा शाही स्नान किया जाना था। सभी अखाड़ों के जुलूस का अपनी छावनी से हर की पैड़ी तक पहुंचने और स्नान कर अपनी छावनी में वापस आने तक का मार्ग हरिद्वार शहर के बीचों बीच स्थित अपर रोड निर्धारित था। अखाड़ों के स्नान का क्रम, स्नान का समय और आने जाने का मार्ग हर तरह से निश्चित हो चुका था। जूना अखाड़ा के शाही स्नान का जुलूस अपने पूर्व निर्धारित क्रम और समय पर पूरी भव्यता के साथ मायादेवी प्रांगण स्थित छावनी से निकल हर की पैड़ी की ओर चल पड़ा। जूना द्वारा अपने निर्धारित समय पर हर की पैड़ी पहुँच कर स्नान प्रारंभ कर दिया गया परन्तुं जूना अखाड़े के ही जुलूस का हिस्सा किन्नर अखाड़ा विलंब से छावनी से निकला।
विलंब से निकलने के कारण किन्नर अखाड़े के पदाधिकारी अपने अनुयायियों सहित हर की पैड़ी पर स्नान हेतु उस समय पहुंचे जिस समय निरंजनी अखाड़ा अपने निर्धारित समय पर छावनी से निकल कर हर की पैड़ी की और बढ़ चुका था। समय सीमा के इस अतिक्रमण के कारण दोनो अखाड़ों का अपर रोड पर किसी भी जगह एक दूसरे के आमने-सामने पड़ना और 1998 के रक्त रंजित इतिहास का दोहराया जाना तय था।

Kumbh Mela Haridwar 2021

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किन्नर अखाडे के कारण पैदा हुए हालात को पुलिस ने कैसे संभाला
शाही स्नान के दौरान बनी इस परिस्थिति की जानकारी जैसे ही पुलिस-प्रशासन के अधिकारीगण को हुई तो भयावह परिणाम की कल्पना से ही सबके हाथ पांव फूल गए। आनन फानन में आईजी कुम्भ संजय गुंज्याल अपने कुछ अनुभवी और कुशल पुलिस अधिकारियों को लेकर तुलसी चौक पहुंचे जहाँ से निरंजनी अखाड़े को मुड़कर अपर रोड पर पहुंचना था और जूना से आमना-सामना होने की परिस्तिथी बननी थी। हालात सामान्य नहीं था इसलिए आईजी संजय गुंज्याल ने निरंजनी अखाडे की पेशवाई को तुलसी चौक पर रोकने का प्लान बनाया लेकिन ज्यादा देर तक रोक पाना संभव नहीं था। इसलिए आईजी मेला ने हर की पैड़ी की और अग्रसर निरंजनी अखाड़े के पदाधिकारियों से आग्रह किया गया कि माननीय मुख्यमंत्री के आदेश पर आपके शाही स्नान के जुलूस पर पुष्पवर्षा किया जाना है जिस हेतु तुलसी चौक का चयन किया गया है इसलिए आप अपने जुलूस की तुलसी चौक पर ले जाकर थोड़ी देर के लिए रोक दें ताकि हेलीकॉप्टर आपके जुलूस पर पुष्पवर्षा करके उत्तराखंड सरकार की ओर से आपका स्वागत सम्मान कर सके।

Kumbh Mela Haridwar 2021

आईजी कुम्भ के इस आग्रह को अखाड़े के पदाधिकारियों द्वारा सहर्ष स्वीकार कर लिया गया। इसी दौरान आईजी कुम्भ के द्वारा किन्नर अखाड़े के साथ जुलूस ड्यूटी पर लगे पुलिसबल को निर्देशित किया गया कि जितना जल्दी हो सके किन्नर अखाड़े को वापस अपनी छावनी में पहुंचा दिया जाए। निरंजनी अखाड़े का जुलूस आग्रह के अनुसार तुलसी चौक पर पहुंच कर रुक गया और इधर जूना के जुलूस में लगा पुलिसबल किन्नर अखाड़े को जल्द से जल्द उनकी छावनी में पहुंचाने की मशक्कत पर लग गया। लेकिन किन्नर अखाड़े को छावनी में पहुंचाने में समय लगना तय था और ज्यादा देर तक निरंजनी अखाड़े को तुलसी चौक पर रोके रखना भी टेढ़ी खीर था।

Kumbh mela Haridwar 2021
Kumbh mela Haridwar 2021

मौके की नजाकत को भांपते हुए आईजी कुम्भ के द्वारा हेलीकॉप्टर के पायलट से बात की गई और उसको बताया गया कि तुलसी चौक के ऊपर चक्कर लगाता रहे परन्तुं पुष्पवर्षा तभी करे जब उसे कहा जाए। इस पर हेलीकॉप्टर के पायलट द्वारा तुलसी चौक पर आकर निरंजनी अखाड़े के जुलूस के कभी ऊपर कभी नीचे जाकर चक्कर लगाना शुरू कर दिया गया। इधर पुलिसबल किन्नर अखाड़े को लेकर छावनी में प्रवेश कराने के नजदीक पहुंच गया। तुलसी चौक पर निरंजनी अखाड़े के जुलूस के ऊपर चल रही हेलीकॉप्टर की कलाबाजियों के दौरान थोड़ी देर में ही मैसेज आया कि किन्नर अखाड़ा अपनी छावनी में सकुशल प्रवेश कर गया है। इस संदेश के प्राप्त होने के साथ ही सबने राहत की सांस ली और आईजी कुम्भ के निर्देश पर हेलीकॉप्टर ने निरंजनी अखाड़े के जुलूस पर धुंआधार पुष्पवर्षा शुरू कर दी।

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क्या हुई थी 1998 कुंभ की रक्तरंजित घटना

वर्ष 1998 में हरिद्वार में कुम्भ का आयोजन हुआ और शाही स्नान का कार्यक्रम हमेशा की तरह तय किया गया। परन्तु निरंजनी अखाड़े के हजारों नागाओं को स्नान में देरी हो गई। स्नान के अगले क्रम में अपनी बारी का इंतजार कर रहे जूना, अग्नि और आह्वान अखाड़ों के तमाम नागा बिफर उठे और हर की पैड़ी पर जबरदस्त संग्राम और मारकाट शुरू हो गई। इस खूनी संघर्ष में अनेक साधु और पुलिसकर्मी घायल हुए।
उसके बाद इस घटना से सबक लेते हुए देश मे आज तक जहाँ भी कुम्भ का आयोजन किया गया वहां के पुलिस प्रशासन ने हमेशा इस बात का प्राथमिकता के आधार पर ध्यान रखा कि अखाड़ों के शाही स्नान की तय व्यवस्था को लागू करने में लेशमात्र कोताही न होने पाए। हरिद्वार में आयोजित होने वाले कुम्भ मेलों में तो तब से इस बात का विशेष ध्यान रखा जाने लगा।

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