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उदासीन संप्रदाय के प्रवर्तक भगवान श्री चंद्राचार्य की 525वीं जयंती पर निकाली शोभायात्रा

 श्रवण झा।
उदासीन संप्रदाय के प्रवर्तक भगवान श्री चंद्राचार्य की 525वीं जयंती के अवसर पर आज हरिद्वार में रानीपुर मोड़ के चंद्राचार्य चौक से भव्य शोभायात्रा निकाली गई। शोभा यात्रा का उद्घाटन कुंभ मेलाधिकारी दीपक रावत ने नारियल फोड़कर किया। इस अवसर पर हरिद्वार के कुंभ मेलाधिकारी दीपक रावत, मेला आईजी संजय गुंज्याल, जिलाधिकारी दीपेंद्र चौधरी और श्री पंचायती उदासीन बड़ा अखाड़ा राजघाट कनखल के महन्त रघु मुनि महाराज ने संयुक्त रूप से भगवान श्री चंद्राचार्य का पूजन किया। शोभायात्रा में बड़ी तादाद में साधु संत और गणमान्य नागरिक शामिल हुए। हरिद्वार कनखल के मुख्य बाजारों से होते हुए शोभा यात्रा श्री पंचायती उदासीन बड़ा अखाड़ा राजघाट में समाप्त हुई। शोभायात्रा से पूर्व कनखल में भगवान श्री चंद्राचार्य के मंदिर में वैदिक विधि-विधान के साथ पूजन किया गया। शोभायात्रा में विभिन्न प्रकार की धार्मिक झांकियां थी।
भगवान श्री चंद्राचार्य के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कुंभ मेलाधिकारी दीपक रावत ने कहा कि समाज में व्याप्त कुरीतियों को दूर करने का काम भगवान श्री चंद्राचार्य ने किया। वह सादगी और तपस्वी जीवन की एक महान मिसाल थे। उन्होंने समाज को नई दिशा दी और जीवन में त्याग और तपस्या को सर्वोत्तम बताया। रावत ने कहा कि भगवान श्री चंद्राचार्य के विचार हर युग में प्रासंगिक रहेंगे।
हरिद्वार के जिलाधिकारी दीपेंद्र चौधरी ने कहा कि भगवान श्री चंद्र आचार्य का जीवन अनुकरणीय है। उन्होंने समाज को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने का अहम कार्य किया। वे महामानव थे और उन्होंने अवतार लेकर समाज को अंधविश्वासों से मुक्त किया। श्री पंचायती महानिर्वाणी अखाड़ा के श्रीमहन्त महेश्वर दास महाराज ने कहा कि भगवान श्री चंद्राचार्य गुरु नानक देव जी के सुपुत्र थे और उन्होंने समाज को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। महन्त रघु मुनि महाराज ने कहा कि भगवान श्री चंद्राचार्य ऐसे अवतरित महापुरुष थे जिन्होंने समाज में व्याप्त ऊंच-नीच के भेदभाव को समाप्त किया और समतामूलक समाज की स्थापना में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा। अखाड़ा के कोठारी महन्त प्रेमदास ने कहा कि भगवान श्री चंद्राचार्य ने उदासीन संप्रदाय की स्थापना कर समाज को जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य किया।
शोभायात्रा में श्री निर्मल पंचायती अखाड़ा के श्रीमहंत ज्ञानदेव सिंह महाराज, श्री पंचायती महानिर्वाणी अखाड़ा के सचिव महन्त रविंद्र पुरी महाराज, श्री पंचायती उदासीन बड़ा अखाड़ा के महन्त प्रकाशमुनि, महन्त निरंजन दास, महन्त राजेंद्रानंद महाराज, महन्त भगत राम महाराज, महन्त धुनी दास महाराज, महन्त रघुवीर दास, महामंडलेश्वर हरि चेतनानंद, कारोबारी महन्त निर्मल दास महाराज, कारोबारी महन्त ब्रह्म मुनि महाराज, महन्त राघवेंद्र दास, महन्त मोहन सिंह भजन गढ़ वाले, महन्त जगदीशानंद महाराज, महामंडलेश्वर चिदविलासानंद महाराज, महन्त अमनदीप सिंह महाराज, कोठारी महन्त जसविंदर सिंह महाराज, महामंडलेश्वर संतोषानंद महाराज, महंत रूपेंद्र प्रकाश महाराज, गंगा सभा के पूर्व अध्यक्ष पुरुषोत्तम शर्मा गांधीवादी, समाजसेवी सुधीर कुमार गुप्ता, पार्षद नितिन माना, भूपेंद्र कुमार, कनखल व्यापार मंडल के अध्यक्ष भगवत शरण अग्रवाल, प्रदुमन अग्रवाल आदि शामिल थे।

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