युवा तुर्क

युवा तुर्क—’खुद पर हुए जुल्म ने राजनीति में आने की प्रेरणा दी’

कांग्रेस बैनर तले राजनीति कर रहे युवा तुर्क अनिल भास्कर सामाजिक मसलों पर आवाज बुलंद करते रहे हैं। छात्र राजनीति से उनकी शुरूआत हुई और आज वो कांग्रेस की मुख्य बॉडी में काम कर रहे हैं। युवाओं की राजनीति में क्या भूमिका वो देखते हैं आइये जानते हैं उनसे….

प्रश्न— राजनीति में युवाओं की भूमिका किस तरह देखते हैं?

उत्तर: युवाओं की भूमिका राजनीती में बहुत महत्वपूर्ण है लेकिन युवा इस जिमेदारी के लिये आगे नही आ रहे। बड़े दुःख का विषय तो यह है कि आज का अधिकांश युवा राजनीति को मौज मस्ती का माध्यम मानने लगा है। जो भविष्य के लिये अच्छा संकेत नही है, व्यापक और खुले विचारों वाले युवा अब नज़र नही आते। जमीनी समस्याओं के निराकरण के उपाय तो वो सोच ही नही रहे। इसी कारण आज अफसरशाही हावी हो रही है क्योकि अब युवाओं में संघर्ष के बजाय स्वार्थ अधिक नज़र आता है। इस परिस्थति के लिए वो नेता अधिक जिम्मेदार है जो पिछले 15 सालों से देश के युवाओं और महिलाओं को झूठे वादों से इस्तेमाल कर रहे है, अगर युवा राजनीति में नही आयेगा तो देश में नई सोच विकसित नही हो पायेगी।

प्रश्न— आपको राजनीति में आने के लिए किससे प्रेरणा मिली?

उत्तर— राजनीती में आने की प्रेरणा खुद के साथ घटी घटना से आयी। एक पुलिस केस में खुद बेकसूर होते हुए भी संबंधो का सहारा लेना पड़ा। 12वीं क्लास में ही तय कर लिया था कि कुछ करना है जिससे लोगो की मदद कर सके और सही के लिये हिम्मत से खड़े हो सके।

unnamed-7

प्रश्न— आपकी शुरूआत छात्र राजनीति से हुई या किसी और कारण से राजनीति में आए हैं या फिर सीधे ही सक्रिय राजनीति में आए हैं?

उत्तर— जैसा बताया कि मेरी कुछ करने की शुरुआत एक घटना के साथ हुई। 1989 में हरिद्वार के नया जिला बनने के साथ ही डीएम ऑफिस में नौकरी भी लग रही थी बस इंटरव्यू होना था लेकिन स्वतंत्र काम करने की चाह ने नौकरी नही करने दी। पत्रकारिता का शौक़ शुरू से था तो शुरुआत तो पत्रकारिता से हुई। साथ ही छात्र राजनीति से जुड़ा रहा। सावक मंच से छात्र राजनीति बहुत आक्रामक तरीके से की। लेकिन फिर सावक मंच से अलग होकर नगर विकास मंच संस्था बनायी, जिसके बैनर के नीचे गुरुकुल छात्र संघ के 3 साल तक हमारे और हमारे गठबंधन के युवा हमारी रणनीति के अनुसार जीतते रहे। लेकिन 1998 में खुले तौर पर राजनीति में आया और युवा कांग्रेस हरिद्वार का शहर अध्यक्ष बना और और फिर यूपी का प्रदेश महासचिव। उत्तराखंड बना तो प्रदेश की युवा कांग्रेस की 27 सदस्य की समन्वय कमेटी का सदस्य रहा, सेवादल का प्रदेश प्रवक्ता, महानगर में महासचिव। और अब कांग्रेस संगठन में प्रदेश में सचिव। कई जिलों के प्रभारियो की जिम्मेदारी भी निभायी। 2014 में राहुल गांधी जी ने पुरे देश में 22 लोक सभा में प्रॉयमरी कराई जिसके अनुसार प्रत्याशी को तय उसी इलाके के कार्यकर्त्ता चुनाव करके करना था। संगठन के चुनाव की उस टीम का सदस्य रहने के सौभाग्य मुझे भी प्राप्त हुआ। अभी कांग्रेस और सावक मंच दोनों से हम समस्याओं को उठा रहे है और जन आंदोलन बनाने में लगे है।

प्रश्न — आप को राजनीति में किन चुनौतियों का सामना करना पड़ा?

उत्तर— चुनोतियों का कोई खास सामना मुझे अभी तक नही करना पड़ा, आंतरिक समस्याओं के लिये सभी अपने साथियों का सहयोग हमेशा मिला और ईश्वर का आशीर्वाद। मुझे पूर्ण संतोष इस बात का है कि जितना मैने किया उसका प्रतिफल मुझे सदैव मिला।
एक बात सदैव जरूर परेशान करती है कि नेताओ को गाली और चोर कहने की जो प्रवर्ति बढ़ती जा रही है वो बेहद गलत है। जबकि इसके लिये दोषी जनता भी उतनी ही है कि वो या तो गलत आदमी चुनती है या उस नेता से जबरदस्ती गलत काम कराती है। अधिकांश यही हो रहा है इसी लिये नेता बेलगाम होते जा रहे है जिसका फायदा गलत आदमी उठा रहा है।
यह चुनोती मेरे ही नही सभी अच्छे नेता के सामने है।

प्रश्न —राजनीति में आने के लिए आपको परिवार में सबसे ज्यादा सहयोग किससे मिला?

उत्तर— पहले माँ का, बाद में पिता जी ने भी समझा लेकिन वो सहयोग करते तब तक उनका देहांत हो गया।
बाकि माँ काली, शनि भगवान का आशीर्वाद सदैव रहा।
मुझे गाय, कुत्ते और बच्चो से बड़ा प्यार है और उनके साथ जो समय गुजरता हूँ वो भी मेरे अंदर उत्साह भरता है।

प्रश्न — अपनी पार्टी को मजबूत करने के लिए आपके पास क्या योजना है।

उत्तर— अभी लगे हुए है ईश्वर का आशीर्वाद रहा तो 2017 में उसका रिजल्ट देखिएगा। तब रणनीति भी बतायेगे। अभी खुलासा करना जल्दबाज़ी होगी।

प्रश्न — भ्रष्टाचार को कैसे खत्म किया जा सकता है।

उत्तर— पहला -अधिकारियो के लिये सिटीजन चार्टर सबसे आसान तरीका है। और चार्टर के अनुसार काम ना करने वाले अधिकारी पर कार्यवाही जरूरी हो।
दूसरा- हर व्यक्ति खुद अपना काम कराने कार्यालयों में जाये। और वहाँ काम ना करने वाले अधिकारियो पर यही तरीके से क़ाम करने का नेताओ का दबाव हो। आज 5% लोग भी सरकारी ऑफिस में नही जाते, आज विधायको, सांसदों या और जनप्रतिनिधियों के यहाँ अलग से सरकारी काम करने के लिये कार्यालयों की भरमार ही रही है जो गलत तरीका है और भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल रहा है।

प्रश्न — अपने क्षेत्र की तीन प्रमुख समस्याएं बताइये।

उत्तर— समस्याएं तो बहुत है। तीर्थ स्थल होने के कारण गंगा की सफाई, शहर की सफाई और जल निकासी मुख्य है।

प्रश्न — राजनीति में आपका रोल मॉडल कौन है?
उत्तर— इंदिरा जी और राजीव जी और अब राहुल जी की सोच महात्मा गांधी के मॉडल से मिलती है इसलिये प्रभावित हूँ राहुल जी से और उनके नेतृत्व में भारत का भविष्य सुरक्षित लगता है। आरएसएस द्वारा जो राहुल जी की छवि का हनन प्रोग्राम चला हुआ है उस छवि से कार्यशैली है राहुल जी की।

प्रश्न — क्या बिना पैसे के राजनीति में अच्छा मुकाम मिल सकता है?

उत्तर— नही, लेकिन अगर हमने लोगो के बीच उपस्थित रख कर अच्छे काम किया तो जनता उसका इनाम बिना पैसा भी देती है।

प्रश्न — क्या भाई—भतीजावाद के सामने युवा प्रतिभा दम तोड रही हैं?

उत्तर— कुछ तो नुकसान होता ही है लेकिन प्रतिभा में अगर दम है तो वो रास्ता निकाल ही लेती है।

प्रश्न —आपके आय के स्रोत क्या हैं, पैसे की किल्लत के कारण कभी परिवार में डांट पड़ती है?

उत्तर— मेरा खुद का व्यवसाय है। पैसे की समस्या का सामना तो अक्सर करना पड़ता है। इसी लिये पिताजी के देहांत के बाद 2001 से 2012 तक राजनीति से विश्राम भी लिया, तब सिर्फ कभी कभी मीटिंग में जाया करता था या संपर्क बनाये रखा।

प्रश्न —आपको मुख्यमंत्री बना दिया जाए, तो आप कौन सा एक काम करना चाहेंगे, जिसके लिए आपको प्रदेश की जनता याद रखे?

उत्तर— सबसे पहले सिटिज़न चार्टर लागु होगा और उनके अनुसार काम ना करने वालो पर कार्यवाही। दूसरा सरकारी कार्यालयों में व्यक्ति का खुद जाना जरूरी किया जायेगा।
यदि कोई मजबूर या दिव्यांग है तो उसके लिये टोल फ्री नंबर होगा उस पर कॉल करने पर सरकारी व्यक्ति ही उसके घर आयेगा।
95% सरकारी और राजनीतिक भ्रस्टाचार दूर होगा।

प्रश्न —क्या आप अपने अब तक के राजनीति करियर से संतुष्ट हैं?

उत्तर— 100% संतुष्ठ हूँ और यह झूठ नही है। राजनीति के साथ साथ मैंने जिंदगी के हर रंग को सकारात्मकता के साथ जीया है।

प्रश्न —आपकी रूचि क्या—क्या हैं?

उत्तर— लगभग सभी विषयों में मेरी रुचि रही है। लेकिन राजनीति, लॉग ड्राइव, हर विषयो पर किताबे पड़ना, लोगो की मदद करना, गौशाला में समय गुजरना, लगभग सभी विषयों पर चर्चा करना, बच्चो के साथ खेलना, सभी धर्मों के आद्यात्मिक स्थलों पर जाना मेरे प्रिय शौक है। फक्कड़पन पसंद है, आर्थिक और वाणिज्यक विषय पसंद नही।
प्रश्न —आपके पसंदीदा लेखक, एक्टर, एक्ट्रेस, खिलाड़ी और पत्रकार का नाम बताएं?

लेखक- प्रेमचंद, शरलॉक होम्स, खुशवंत सिंह।
एक्टर- नसीरुद्दीन शाह, धर्मेंद्र, राजकुमार।
एक्ट्रेस- साधना, नीलम, माधुरी, दीपिका पादुकोण

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.